जाति प्रमाण पत्र के नाम पर 50 हजार की मांग का आरोप, लेखपाल निलंबित ऑडियो रिकॉर्डिंग की शिकायत के बाद डीएम ने की कार्रवाई, विभागीय जांच के आदेश
बलिया। जाति प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। तहसील सदर के राजस्व ग्राम सुल्तानपुर में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला सुल्तानपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तुरैहा जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लेखपाल एवं अन्य राजस्व कर्मियों द्वारा प्रति आवेदन 50 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायत के साथ मोबाइल पर हुई कथित बातचीत की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई गईं।
तहसीलदार सदर की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता ने पूर्व में ऑनलाइन जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए थे, जिन्हें आवश्यक साक्ष्य एवं अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमानुसार पोर्टल पर आख्या सहित निस्तारित/निरस्त किया गया था।
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई रिकॉर्डिंग की प्राथमिक जांच में बातचीत करने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि शिकायतकर्ता ने आवाज को क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह की बताया है। रिपोर्ट में रिकॉर्डिंग में जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कथित रूप से 50 हजार रुपये मांगने और रकम का कुछ हिस्सा अधिकारियों तक पहुंचाने संबंधी बातचीत होने का उल्लेख किया गया है।
मामले को गंभीर मानते हुए तहसीलदार ने निष्पक्ष जांच के लिए लेखपाल के निलंबन और विभागीय जांच की संस्तुति की। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर संदीप सिंह को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन अवधि में लेखपाल को तहसील बलिया के भूलेख कार्यालय से संबद्ध किया गया है। आदेश के अनुसार सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
डीएम ने दी सख्त चेतावनी
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी कार्य के बदले अवैध धन की मांग या किसी भी प्रकार की भ्रष्ट गतिविधि सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को जनसामान्य से जुड़े प्रमाण पत्रों और अन्य सेवाओं का निस्तारण नियमानुसार एवं पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

