सावन में बाबा बैद्यनाथ धाम ले जाने वाले उमाशंकर सिंह खुद निकल पड़े अनंत यात्रा पर, रो पड़ा पूरा बलिया
बलिया। हर साल सावन के पावन महीने में हजारों श्रद्धालुओं को अपने निजी खर्च पर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कराने वाले रसड़ा विधानसभा के लोकप्रिय विधायक एवं गरीबों के मसीहा उमाशंकर सिंह इस बार खुद ऐसी यात्रा पर निकल पड़े, जहां से कोई लौटकर नहीं आता। 5 अगस्त को दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे बलिया सहित पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई।
दिल्ली से उनका पार्थिव शरीर लखनऊ लाया गया, जहां मुख्यमंत्री समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते अंतिम यात्रा रसड़ा पहुंची। चंद्रशेखर आज़ाद चौराहे से लेकर उनके पैतृक गांव खनवर तक सड़कें लोगों से भर गईं। मकानों की छतों, दुकानों और गलियों में खड़े हजारों लोग अपने प्रिय जननेता की अंतिम एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।
7 अगस्त को खनवर से बयासी घाट तक निकली अंतिम यात्रा में अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ “उमाशंकर भैया अमर रहें” के नारे गूंजते रहे। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे नम आंखों से अपने जननायक को अंतिम विदाई देते दिखाई दिए। अंतिम यात्रा में सभी राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठन और हजारों समर्थक शामिल हुए।
उमाशंकर सिंह सिर्फ एक विधायक नहीं थे, बल्कि गरीबों के सहारा, बेटियों के संरक्षक और हर जरूरतमंद की उम्मीद थे। उन्होंने सैकड़ों गरीब बेटियों की शादी कराई, कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए, बाढ़ पीड़ितों की मदद की और हजारों लोगों को बाबा बैद्यनाथ धाम, महाकाल तथा अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई। यही वजह थी कि लोग उन्हें प्यार से “रॉबिनहुड” कहकर पुकारते थे।
इस बार सावन में वे श्रद्धालुओं के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम नहीं जा सके, बल्कि स्वयं अनंत यात्रा पर निकल पड़े। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात की गवाही देता रहा कि कुछ लोग केवल राजनीति नहीं करते, बल्कि लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना लेते हैं। उमाशंकर सिंह का जाना बलिया की राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।



