दो साल से बच्चों की थाली खाली, कागजों में चलता रहा मिड-डे मील! डीएम की जांच में 14 लाख का खेल
बलिया। बांसडीह के ताजपुर मुड़ियारी कॉलेज में मध्याह्न भोजन योजना की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि दो साल से बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिला, लेकिन योजना का पैसा हर महीने निकलता रहा। आखिर बच्चों के हिस्से का भोजन और सरकारी धन गया कहां?
हैरानी की बात यह है कि मामले का खुलासा किसी अधिकारी की निगरानी से नहीं, बल्कि बच्चों की चिट्ठी से हुआ। बच्चों ने इंटरनेट पर डीएम बलिया का पता खोजा और चिट्ठी भेजकर अपनी पीड़ा बताई। डर की वजह से बच्चों ने अपना नाम सार्वजनिक न करने की गुहार लगाई और डीएम से गुप्त जांच कराने की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच कराई तो मामला और गंभीर निकला। बीएसए और डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट में करीब 14 लाख रुपये की अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि मिड-डे मील के लिए हर महीने धनराशि जाती रही, लेकिन बच्चों की थाली तक भोजन नहीं पहुंचा।
यानी सरकारी रिकॉर्ड में भोजन चलता रहा और स्कूल में बच्चों की थाली खाली रही! दो साल तक जिम्मेदारों की निगरानी आखिर कहां थी? यदि बच्चों ने डीएम को चिट्ठी नहीं लिखी होती तो क्या यह कथित अनियमितता सामने आती?
मामले में एमडीएम प्रभारी अजीत पाठक पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बीएसए और डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने कार्रवाई की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14 लाख रुपये की कथित अनियमितता के लिए आखिर कौन-कौन जिम्मेदार है? क्या सिर्फ एक कर्मचारी पर कार्रवाई करके मामला खत्म होगा या फिर उस पूरी व्यवस्था की भी जवाबदेही तय होगी, जिसके रहते बच्चों की थाली दो साल तक खाली रही?



