सरकारी खलिहान, ताल पोखरी और चकमार्ग पर कब्जे का मामला गरमाया, हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन सक्रिय
बलिया। रसड़ा तहसील क्षेत्र के खनवर नवादा गांव में सरकारी खलिहान, ताल पोखरी और चकमार्ग की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश और तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। तहसीलदार रसड़ा ने अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 25 जुलाई 2026 तक सरकारी भूमि खाली करने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम खनवर नवादा की गाटा संख्या-599 (0.1380 हेक्टेयर) दर्ज सरकारी खलिहान, गाटा संख्या-594 (0.9950 हेक्टेयर) ताल पोखरी तथा गाटा संख्या-653 चकमार्ग की भूमि पर वर्षों से कथित रूप से अवैध कब्जा कर मकान, सहन और अन्य निर्माण कर लिए गए हैं। आरोप है कि चकमार्ग पर कब्जे से सार्वजनिक आवागमन भी प्रभावित हो रहा है, जबकि ताल पोखरी की मेड़बंदी और सुंदरीकरण कार्य में भी बाधा उत्पन्न की जा रही है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत बेदखली वाद विचाराधीन रहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 29 अगस्त 2022 के आदेश के अनुपालन में तहसीलदार न्यायालय ने 22 सितंबर 2023 को बेदखली का आदेश पारित किया था। इसके बावजूद कथित अतिक्रमण नहीं हटने पर शिकायतकर्ता मनोज कुमार भारती ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की है।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में राम केसर, नंदलाल, बनारसी, शिवलाल, सूबेदार, अकालू, हीरा, गिरधारी, हीरा तथा केशव निवासी खनवर नवादा को 25 जुलाई 2026 तक सरकारी खलिहान से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तय समय सीमा तक कब्जा नहीं हटाया गया तो राजस्व एवं पुलिस टीम की मौजूदगी में बलपूर्वक बेदखली की जाएगी तथा अतिक्रमण हटाने में आने वाला खर्च और क्षतिपूर्ति की धनराशि भी संबंधित लोगों से वसूली जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में कुल 17 लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। नोटिस जारी होने के बाद गांव में हलचल तेज हो गई है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि सरकारी खलिहान, ताल पोखरी और चकमार्ग को वास्तव में अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है या नहीं।



