घायल महिला थाने पहुंची, 60 घंटे बाद दर्ज हुआ मुकदमा सिर फोड़ने का आरोप, घटना के दिन दी थी तहरीर और कराया था मेडिकल; मधुबन पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
मऊ। मधुबन थाना क्षेत्र के सिकरीकोल गांव में भूमि विवाद को लेकर महिला के साथ मारपीट के मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि घर में घुसकर लाठी-डंडों से हमला कर महिला का सिर फोड़ दिया गया। घटना के बाद पीड़िता ने उसी दिन थाने पहुंचकर तहरीर दी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव में मेडिकल भी कराया, लेकिन मुकदमा दर्ज होने में करीब 60 घंटे लग गए।
पीड़िता मीना देवी के अनुसार, चार सितंबर की सुबह करीब आठ बजे उनके पाटीदार वीरबहादुर सिंह कथित रूप से बिना पैमाइश और बंटवारे के भूमि पर पौधा लगा रहे थे। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि वीरबहादुर सिंह अपने साथियों सिद्धार्थ और आजाद के साथ लाठी-डंडे लेकर घर में घुस आए और गाली-गलौज करते हुए मीना देवी के साथ मारपीट की। हमले में उनके सिर में गंभीर चोट लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ीं। बचाने पहुंचे उनके पति इंद्रजीत सिंह के साथ भी मारपीट तथा धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद पीड़िता ने मधुबन थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। इसके बाद उसका चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया। इसके बावजूद पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया। आखिरकार छह सितंबर की रात 10:52 बजे एफआईआर संख्या 0334/2026 दर्ज की गई।
पुलिस ने वीरबहादुर सिंह, सिद्धार्थ और आजाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 352, 351(3), 333 और 110 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक दीप नारायण कुमार को सौंपी गई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल मुकदमा दर्ज करने में हुई देरी को लेकर है। जब पीड़िता ने घटना के दिन ही तहरीर दी थी और उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था, तो एफआईआर दर्ज करने में दो दिन से अधिक का समय क्यों लगा? एफआईआर में देरी के कारण को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना है कि पुलिस के उच्चाधिकारी इस देरी को किस रूप में लेते हैं और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।



