धूल खा रहे कंप्यूटर-टेलीफोन, गायब था ड्यूटी चार्ट; डीएम ने लगाई फटकार
बलिया। बाढ़ के बीच प्रशासनिक तैयारियों की हकीकत परखने रविवार को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह बैरिया तहसील के आपदा कंट्रोल रूम में औचक निरीक्षण करने पहुंचे। यहां व्यवस्था देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। कंप्यूटर, टेलीफोन और फाइलों पर धूल जमी मिली, ड्यूटी चार्ट और कम्युनिकेशन प्लान तक उपलब्ध नहीं था।
निरीक्षण के दौरान जनगणना ऑपरेटर नंदलाल और निर्वाचन ऑपरेटर रितेश जायसवाल मौजूद मिले। वहीं एक बाहरी व्यक्ति के कंट्रोल रूम में बैठे मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि आपदा कंट्रोल रूम में केवल अधिकृत कर्मचारी ही मौजूद रहें।
कंट्रोल रूम में तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की ड्यूटी की व्यवस्था होनी थी, लेकिन मौके पर ड्यूटी चार्ट के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिली। अभिलेख भी व्यवस्थित नहीं थे। टूटे शीशे वाली बेंच और धूल से अटे उपकरणों को देखकर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
बाढ़ के आंकड़ों ने बढ़ाई नाराजगी
तहसील कार्यालय के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने रजिस्ट्रार कानूनगो रमेश कुमार वर्मा से बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या पूछी। अधिकारियों ने 19 गांव प्रभावित बताए, जबकि उपलब्ध जानकारी में 33 गांव बाढ़ की चपेट में पाए गए। आंकड़ों में इस बड़े अंतर पर डीएम ने रजिस्ट्रार और कानूनगो को कड़ी फटकार लगाई।
उन्होंने निर्देश दिया कि बाढ़ से संबंधित सूचनाओं का प्रतिदिन कंप्यूटर सिस्टम पर सत्यापन कराया जाए और वास्तविक स्थिति को तत्काल अपडेट किया जाए। घाघरा और गंगा नदी से संबंधित बाढ़ रिपोर्ट के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई।
डीएम ने दो टूक कहा कि आपदा के समय गलत सूचना या लापरवाही भारी पड़ सकती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सही और अद्यतन जानकारी प्रशासन के पास रहनी चाहिए, ताकि जरूरतमंदों तक समय से राहत और बचाव पहुंचाया जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में लापरवाही दोबारा सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।



